प्रियतमा के वास्ते's image
Share0 Bookmarks 221 Reads1 Likes
मेरी लेखनी मेरी कविता 
प्रियतमा के वास्ते
(कविता)

प्रियतमा के वास्ते
खुलते हैं सारे रास्ते,
जिंदगी की सुबह शाम
 होती है तेरे वास्ते!

तेरी नैनो की सुर्खियां 
मन को बहलाती हैं ,
विचलित हो मन
तो करार लाती हैं ।

तेरा प्यार से बोलना 
धीरे से लव खोलना 
कपोलों की सुर्खियां
दिन रात याद आती हैं ।।

तू ही सँवारती,
 तू ही दुलारती,
सबका सम्मान रखती 
खुद को संवारती।।

तुम हो स्तंभ जीवन वास्ते 
प्रियतमा के वास्ते
 खुलते हैं सारे रास्ते।।

हरिशंकर सिंह सारांश      

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts