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प्रकृति के हैं लाखों सोपान (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' March 20, 2022
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मेरी लेखनी,, मेरी कविता
 प्रकृति के हैं लाखों सोपान
(कविता)
प्रकृति विशेषांक

प्रकृति के लाखों हैं सोपान
 चाहे कोई जीवन ढूंँढे,
चाहे ढूंँढे ज्ञान ।
प्रकृति के लाखों हैं सोपान।
  
मेरे चमन की शान निराली
कण-कण में फैली हरियाली,
 छोटे ,बड़े सभी पलते हैं
 अजब है इसकी शान।
 प्रकृति के लाखों हैं सोपान।।

 जीवन को ऐसे रचती है
 कण-कण में धारा बहती है, 
पल -पल यह मानव को देती
 है उसकी पहचान।
 प्रकृति के हैं लाखों सोपान।।
 
कण-कण में जीवटता बसती
 हर प्राणी मानव को रचती।
 देती है पहचान ,
प्रकृति के लाखों हैं सोपान ।।

बढ़ो निरंतर पथ पर अपने
 सबको यह सिखलाती ।
जीवन एक  निरंतर पथ है
 इसका ज्ञान कराती।

 ना खेलो तुम नाहक इससे
सबको यह समझाती ।
छोटे और बड़ों को देती
 सच्चाई का ज्ञान।
 प्रकृति के लाखों हैं सोपान।।

 हरि शंकर सिंह सारांश  

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