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पिता एक उम्मीद है एक आस है( कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' May 11, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 
पिता एक उम्मीद है एक आस है 
(कविता) पिता विशेषांक 

पिता एक उम्मीद है
 एक आश है।
 परिवार की हिम्मत
 और विश्वास है।।

बाहर से सख्त
 अंदर से नरम है।
 उसके दिल में छुपे
 कई मर्म  हैं।।

पिता संघर्ष की आंँधियों में
  हौसलों की दीवार है,
परेशानियों से लड़ने की
दो धारी तलवार है ।।

बचपन में खुश करने वाला
 खिलौना है
नींद लगे तो पेट पर
 सुलाने वाला बिछोना है।

पिता जमीर, है जागीर है 
जिसके पास यह है
वह बड़ा अमीर है।
पिता मानव के रूप में
 खुदा की तस्वीर है।।

हरिशंकर सिंह सारांश       

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