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पाठ प्रेम का पढ़े चलो (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' May 28, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 
पाठ प्रेम का पढ़े चलो
 (कविता)

फूल बिछे हों या हों कांटे 
राह न अपनी छोड़ो तुम
चाहे जो भी विपदा आएँ
मुख को जरा न मोडो तुम ।।

साथ रहें या रहें न साथी 
हिम्मत कभी न छोड़ो तुम।
नहीं कृपा की भिक्षा मांगो   
कर न दीन बन जोड़ो तुम।।

बस ईश्वर पर रखो भरोसा 
पाठ प्रेम का पढ़े चलो 
जब तक जान बची हो तन में 
तब तक आगे बढ़े चलो ।।

हरिशंकर सिंह सारांश   

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