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मेरी लेखनी मेरी कविता 
नफरत के बीज न बोना
(कविता) अमन विशेषांक
 
युगों युगों से बनी हुई
वह परंँपरा ना खोना।
 नफरत के बीज न बोना। 
 साथ रहे हैं ,साथ रहेंगे
मिलकर सारे कार्य करेंगे।।
 नफरत के ठेकेदारों को तुम
 दिखला देना कोना
नफरत के बीज न होना।।

नफरत फैलाने वाले तो केवल
 नफरत ही फैलाते हैं।
 उनका दूजा काज नहीं
 बस आपस में लड़बाते हैं ।।
ऐसे विष बीजों को तुम
ना कभी चमन में बोना
नफरत के बीज न होना ।।

सच्चाई के साथ रहो तुम
करो बुराई का प्रतिकार ।
प्रेम से रहना काम हमारा 
नफरत बीज नहीं आधार ।।
नफरत की तुम फसल काट दो 
बनकर सच्चा सोना ।
नफरत के बीज न बोना ।।

हरिशंकर सिंह सारांश 
 

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