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नमन कर मात और पित को (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' October 10, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 
नमन कर मात और पित को
(कविता)

नमन कर मात और पित को
 तुम्हें आशीष लेनी है।
 सफल हो जाए यह जीवन
तुम्हें सौगात लेनी है।।

 बड़े जतनों से सींचा है
  वो उपवन छोड़ जाएंगे
 इसी उपवन की तुमको ही
 वायु प्राण लेनी है ।।

नमन कर मात और पित को
 तुम्हें आशीष  लेनी है।।

तुम्हारे वास्ते जीवन का
 हर मोती पिरोया है
 फकत पाने की चाहत में
 उम्र भर खूब खोया है।।

  तेरी खातिर ये आंखें भी
 सपने देखती रहतीं
इन्हीं आंखों की खातिर
ज्ञान की  पतवार लेनी है। 
 नमन कर मात और पित को 
  तुम्हें आशीष लेनी है ।।

हरिशंकर सिंह सारांश    

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