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नहीं भूलते उन वृक्षों को जिनकी शीतल छाया,जन्म जन्म से ऋणी है जिनकी हर मानव की काया (कविता)गोकुल जी को समर्पित

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' March 14, 2022
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता
"नहीं भूलते उन वृक्षों को जिनकी शीतल छाया" गोकुल जी को समर्पित (कविता)

नहीं भूलते उन वृक्षों को
जिन की शीतल छाया ,
जन्म जन्म से ऋणी है जिनकी
 हर मानव की काया।

   याद करो उस सूरवीर को
जिसकी कंँचन काया। 
देश की खातिर जिसने अपना
शान से शीश कटाया ।
नहीं भूलते उन वृक्षों को
जिनकी शीतल छाया ।

सन 66 की बात
मुगल भारी उत्पात मचाया ,
खेती और किसानी पर था
भारी संकट आया।
 वीर शिरोमणि गोकुल जी ने
 फरमाना भिजवाया। 
नहीं मानते जुल्म की बातें
 चाहे कुछ भी कर लो,
 चाहे संगीनें चलवा लो ,
चाहे खप्पर भर लो।।

 औरंगजेब की सांसें अटकीं 
 जुल्मी समझ ना पाया, 
कैसा यह तूफान उठा है
कैसी अनमिट काया ।
नहीं भूलते उन वृक्षों को
जिनकी शीतल छाया।।

 हाथ कृपाण ,शीश पर पगड़ी
 आंँखों में थी ज्वाला,
 कर में वीरा लिए हुए था
 भारी-भरकम भाला।
 तिलपत का वह वीर साहसी
जरा नहीं घबराया ।
नहीं भूलते उन वृक्षों को
जिन की शीतल छाया।।

 तीन दिनों तक युद्ध हुआ
 भारी जौहर दिखलाया ,
पीछे कदम नहीं रखा
मुगलों को मार भगाया।
 नहीं भूलते उन वृक्षों को
 जिनकी शीतल छाया।।

 हरिशंकर सिंह सारांश 

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