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"मत समझना जुदा हो जाओगे" (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' March 26, 2022
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता
" मत समझना जुदा हो जाओगे"
(कविता) छात्र विदाई विशेषांक 

संँचित ज्ञान का
 विस्तार कर लो।
स्नेह से गुरुओं के तुम
 खाली पड़ी गागर को।
 भर लो।।

 ज्ञान का मंदिर है यह
 इसको कभी ना भूलना।
 कभी डांँट ,कभी दुलार का
 क्रम चलता रहा।
 मन तुम्हारा ज्ञान को
 हर पल ग्रहण करता रहा।।

 आज तुम विदा हो जाओगे
पर मत समझना
जुदा हो जाओगे।

 ये भावुक पल
 कभी ना विसारना।
 कितनी भी हो मुसीबत
सच को न त्यागना ।।

हरिशंकर सिंह सारांश 

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