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मैं तेरी राह का साहिल( कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' February 23, 2022
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मेरी लेखनी, मेरी कविता 
"मैं तेरी राह का साहिल
अदद् पतवार बन जाऊंँ" 
(कविता) गुरु शिष्य विशेषांक 

मैं तेरी राह का साहिल
अदद्  पतवार बन जाऊंँ,
 अनकहे गीत जीवन के
अनकही बात बन जाऊंँ।

 सुने जो गीत जीवन में
मधुर वह खूब लगते हैं,
 मगर जो अनसुने होते हैं
 वो सिरमौर लगते हैं।।
 
इन्हीं अनजान गीतों का
मैं शब्देेआम बन जाऊंँ।
 मैं तेरी राह का साहिल
 अदद् पतवार बन जाऊँँ।। 

बड़ी अनजान फितरत है
 तेरी मेरी कहानी की ,
अजब है दास्तांँ
इस गीत की
और आसनाई की ।।

मैं तेरे गीत का मजनून
इश्तिहार बन जाऊंँ।
मैं तेरी राह का साहिल
अदद् पतवार बन जाऊंँ।।

तेरी फितरत का यह आलम
 कभी बाहर कभी अंँदर
 बड़ा बेचैन होता हूंँ,
 तेरी फितरत को जब देखूंँ
 बड़ा गमगीन होता हूंँ।।

 भुला कर गम की  ये बातें
  मैं तेरी ढाल बन जाऊंँ,
 मैं तेरी राह का साहिल
 अदद् पतवार  बन जाऊंँ।।

करो बस जतन इतना सा
कि जीवन दाख बन जाए।
 रखो भावों को ऐसे तुम
कि दामन  पाक बन जाए।।  

तू मेरा मुस्तकिल बन जा
 मैं तेरी राह बन जाऊंँ, 
मैं तेरी राह का साहिल
 अदद् पतवार  बन जाऊंँ।।

हरिशंकर सिंह सारांश 

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