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मैं बारिश की बूंँद निराली आसमान से आई हूंँ (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' March 14, 2022
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
"मैं बारिश की बूंँद निराली आसमान से आती हूंँ" (कविता)प्रकृति विशेषांँक 

मैं बारिश की बूंँद निराली
आसमान से आती हूंँ।

सागर के आंँचल से निकली
वापस धरती पर आती हूंँ।
 निर्जीव पडे जो बीज धरा पर
उन्हें जगाने आती हूंँ।।
 मैं वर्षा की बूंँद निराली
 आसमान से आती हूंँ।

मैं धरती का गहना हूंँ
 मैं सुंदर उसे बनाती हूंँ,
 मृत जीवन को पानी देकर
मैैं बीजों को उपजाति हूंँ।।

 जैसे निकले गीत हृदय से 
 मैं सागर से आती हूंँ।
 मैं बारिश की बूंँद निराली
आसमान से आती हूूँ ।।

धरती के कोने कोने को
मैं फूलों से मुस्काती हूंँ।
 मैं बारिश की बूंँद निराली
 आसमान से आती हूंँ।।

 निज हित से ऊपर है परहित
मैैं सबको यह बतलाती हूंँ।
 मैं वर्षा की बूंँद निराली
आसमान से आती हूंँ।।

 हरिशंकर सिंह सारांश 

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