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महाराणा सा बीर बनो (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' April 19, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता
महाराणा सा बीर बनो
(कविता) वीरता विशेषांक 

महाराणा सा बीर बनो
 प्राणी तुम गंभीर बनो
 आन बान की खातिर जिसने
 अपना सब कुछ छोड़ा। 
सारे सुख मिट गए
 मगर ना सच्चाई को छोड़ा।।
ऐसे वीर पुरोधा की तुम 
आन बान का मूल बनो ।।

महाराणा सा बीर बनो
 प्राणी तुम गंभीर बनो।। 

सब कुछ जिसने त्याग दिया
ना कर्मठता को छोड़ा
 मातृभूमि की खातिर जिसने
राजमुकुट भी छोड़ा ।।
सारा लालच त्याग दिया
बस देश धर्म का काम किया।
ऐसे प्रण पालक के तुम
सच्चे मन से संभाग बनो ।

महाराणा सा बीर बनो
प्राणी तुम गंभीर बनो ।।   

जिसकी महिमा बहुत बड़ी थी
 शक्ति जिसके साथ खड़ी थी
मुक्त कंठ से उस राणा का
 लोगो तुम गुणगान करो।
सच्ची देशभक्ति का तुम 
नित नित प्रतिपल संचार करो ।।
उस महावीर के माथे का
तुम शौर्य  प्रचंड कपाल बनो।

महाराणा सा बीर बनो 
प्राणी तुम गंभीर बनो।।

हरिशंकर सिंह सारांश      

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