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लिखा परदेश किस्मत में,तो फिर घर बार क्या करना (कविता )

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' March 24, 2022
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मेरी लेखनी, मेरी कविता
"लिखा परदेश किस्मत में, तो घर बार क्या करना? (कविता)

लिखा परदेश किस्मत में
तो फिर घर बार क्या करना?
 अगर बेदर्द हाकिम हो। 
तो फिर फरियाद क्या करना?

परायों की वफाओं का
कसीदा पढ़ते जाना है।
 मगर अपनों की बेकद्री का
 जिक्रे आम क्या करना?

 अगर बेदर्द हाकिम हो
तो फिर फरियाद क्या करना?

 छोड़ता है मुकद्दर
 ऐसी राहों पर।
 जहां पर ज्ञान
 और परवान क्या करना?

 अगर बेदर्द हाकिम हो
 तो फिर फरियाद क्या करना?
 जीवन राह है
चलने की जिद् ठानों
अगर मन में इरादा हो
 तो फिर परवाह क्या करना?

 अगर बेदर्द हाकिम हो
 तो फिर फरियाद क्या करना?

  हरि शंकर सिंह सारांश  

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