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कैसी ल "हालाते जन्नत "(कविता)14 फरवरी शहीद विशेषांक(2 साल पहले की )

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' February 13, 2022
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मेरी लेखनी, मेरी कविता 
हालाते जन्नत( कश्मीर )
14 फरवरी
 पुलवामा शहीदों को समर्पित( कविता)
(2 साल पहले लिखी गई )

भारतवासी देख लीजिए
 येे कैसी लाचारी ।
बड़बोले इन नेताओं पर
 गुस्सा आता भारी
येे कैसी लाचारी ।।

मैं भारत का एक अंँग हूंँ
 सबको यह बतलाऊंँ,
 नाफरमानी क्या होती है
 इसकी झलक दिखाऊँ।

 जन्नत की वादी का मैैं
 तुमको हाल बताऊंँ,
 नाफरमानी क्या होती है?
 इसकी झलक दिखाऊँ।

 फिजाँँ कभी थी
अमन चैन की
आज हुई बर्बादी,
 हाथों में संगीने लेकर
घूम रहे बगदादी।

 अमन चैन सब
खोया इसका,
 बढ़ गए अत्याचारी ।
भारतवासी देख लीजिए
 ये कैसी लाचारी ।।

पत्थरबाजी करने वालों को
 येे बच्चे कहते,
 भारत माता के वह प्रहरी
हरदम गोली सहते;

 ऐसे नेता देश भक्त ना
होते अत्याचारी।
 भारतवासी देख लीजिए
येे कैसी लाचारी ।।

भारत माता के सीने पर
जो गोली चलवाते, 
कुछ नेता इन मिलिटेंटों को
देशभक्त बतलाते ।

बॉर्डर पर रक्षा करना है
 नहीं काम आसानी ,
कुछ लोगों के लिए बन गया
 देशभक्त वह बानी।

 अचरज में हर हिंदुस्तानी
 कैसे बोल बोलते,
 कुछ नेताओं के भाषण से
 जिगरेे एक खून खौलते ।।

क्या मकसद,
क्या जीवन उनका
 पथरावी क्या जाने ?
गलत दिशा में कदम रख रहे
 जाने और अनजाने ।

वोटों की खातिर
ये नेता
पाप करे हैं भारी
भारतवासी देख लीजिए
 यह कैसी लाचारी ।।

कम से कम
 अब चेत जाइए
ऐसे बोल न बोलो, 
परंपरा के आदर्शों की
 तुम यूंँ पोल खोलो ।।

सच को सच
कहने की हिम्मत
तुमको करनी होगी ,
भारत मांँ की सद कर्मों से
झोली भरनी होगी ।।

अगर वक्त पर ना चेते तो
 कीमत होगी भारी ,
भारतवासी देख लीजिए
यह कैसी लाचारी।।

 सांसारिक यह परंपरा है
 सारी दुनिया जाने,
 जिन लोगों के गलत इरादे
 बातों से ना माने।।

 इन पत्थरबाजों पर
अब करवा दो बमबारी
भारतवासी देख लीजिए
यह कैसी लाचारी ।।
 
हिंदुस्तान अखंँड रहेगा
इनको यह बतला दो ,
इन आतंकों के अड्डों को
 तोपो से उडवा दो ।।

गर ऐसा हो जाए
तो फिर
 उलझन मिट जाए सारी,
 भारतवासी देख लीजिए
 यह कैसी लाचारी ।।

हुर्रियत के काले नागों का
राशन पानी बंँद करो ,
जंँजीरों में जकड़ो इनको
 बंँदीगृह में बंद करो ।।

इनको खाली छोड़ा तो
ये फिर  विष वमन करेंगे,
 लाल चौक पर जमाबढ़ा कर
फिर हुंँकार भरेंगे ।।

इनको काबू में कर डालो
 बातें करो न हारी ,
भारतवासी देख लीजिए
 यह कैसी लाचारी।।

हरिशंकर सिंह सारांश

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