"जो नीति वचन चाणक्य दिए " (कविता)'s image
Poetry2 min read

"जो नीति वचन चाणक्य दिए " (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' March 1, 2022
Share0 Bookmarks 1989 Reads1 Likes
मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
"जो नीति वचन चाणक्य दिए"
(कविता) शिक्षक विशेषांक 

हे ज्ञानवान !हे अध्यापक !
कुछ ऐसा कर दिखला दे,
 सारे बच्चे हों ज्ञान पुंँज
 तू ऐसा यश फैला दे।

 गिनते नहीं दिवस हरगिज
रोजाना पढ़ने आते,
 प्रतिदिन आस जगी है मन में
मन का ज्ञान बढ़ाते।।

 इनको इनका ध्यान दीजिए
 मंजिल पाने का रस्ता,
 बोझ बने ना कोमल मन पर
छोटा सा भारी बस्ता।।

 ज्ञान रूप इनको देकर
 तू सब को सबल बनादे।
 हे ज्ञानवान! हे अध्यापक!
 कुछ ऐसा कर दिखला दे।।

 यह झूठ नहीं सच्चाई है,
 सारी दुनिया ने माना है ,
भारत की ज्ञान प्रतिष्ठा को
सब लोगों ने पहचाना है।।

 एक बार फिर
मानव मन पर ,
ज्ञान पुष्प बरसा दे ,
हे ज्ञानवान ! हे अध्यापक !
 कुछ ऐसा कर दिखला दे।।

 जो नीति वचन चाणक्य दिए
 प्रासंगिक हरदम होते ,
जो समय नहीं पहचाने हैं
 वह समय निकलता रोते ।।

उसी रीत और ज्ञान की खातिर
 ज्ञान की ज्योति जला दे ,
हे ज्ञानवान ! हे अध्यापक !
कुछ ऐसा कर दिखला दे।।

 गुरु शिष्य की परंपरा का
है ,यह उज्जवल नाता,
 शिक्षक वह दे रहे ज्ञान जो
जीवन सफल बनाता।।

 सदियों से ही अमिट रहा है
 गुरु शिष्य का नाता ,
परंपरा की खातिर अब
तू इतना कर दिखला दे ।

ज्ञान ,संस्कृति और भाव का
 मन में दीप जला दे,
  हे ज्ञानवान ! हे अध्यापक !
कुछ ऐसा कर दिखला दे।।

 हरिशंकर सिंह सारांश 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts