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झुकजा एै आसमांँ (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' April 26, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 
झुक जा एै आसमांँ
(कविता)

झुक जा एै आसमांँ
 मुझे पैगाम लिखना है। 
समय की रेत पर
मुझको भी अपना
नाम लिखना है ।।

चली जो रेत की आंँधी
 उसे संँबल बनाना है ।
गिरे जो भाल वीरो का
उसे ताकत बनाना है।।
 चले थे बीर जिस भूमि
 उसी पर पैर रखना है।।
समय की रेत पर
मुझको भी अपना
नाम लिखना है।।  

आन के वास्ते वीरों ने
अपना धाम भी छोड़ा।
 मिट गये मातृभूमि पर
पर नहीं आन को छोड़ा।
 उसी बेदी की खातिर
आज इस्तकबाल लिखना है।
 समय की रेत पर मुझको भी
 अपना नाम लिखना है ।।

हरि शंकर सिंह सारांश 
  

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