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जब तेरी डोली निकाली जाएगी (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' April 19, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 
जब तेरी डोली निकाली जाएगी
(कविता) 

जब तेरी डोली निकाली जाएगी
बिन मुहूरत के उठा ली जाएगी।।
 यह किराए पर मिला तुझको मकाँ
 कोठरी खाली करा ली जाएगी।
 जब तेरी डोली निकाली जाएगी।।

यह जिंदगी का घर तेरा
 सपनों की सारी दुनियाँ
खुदगर्ज है जमाना। 
वापस तुझे है जाना।। 
 कुछ कर्म कर जगत में
 कुछ धर्म कर जगत में।
कर्मों की तेरी नेकी
हरगिज़ न खाली जाएगी ।

जब तेरी डोली निकाली जाएगी।
 बिन मुहूरत के उठा ली जाएगी।।

संँसार का ठिकाना त्यागना पड़ेगा, 
जीवन का सारा समरस त्यागना पड़ेगा 
घड़ी रब मिलन की
हरगिज़ न टाली जाएगी ।
जब तेरी डोली निकाली जाएगी
बिन मुहूरत के उठा ली जाएगी ।।

हरिशंकर सिंह सारांश 
  

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