जब जब मैं सोचूंँ, खयालों में आना (कविता)'s image
Poetry1 min read

जब जब मैं सोचूंँ, खयालों में आना (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' February 17, 2022
Share1 Bookmarks 1308 Reads1 Likes
मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
जब जब मैं सोचूूँ ,खयालों में आना 
(कविता)भक्ति विशेषांक 

जब जब मैं सोचूंँ
 सवालों में आना,
 जब जब मैं चाहूंँ
 खयालों में आना ।।

जीवन की मेरी
तमन्ना भी तू है, 
मेरे रास्तों का
 रहकर भी तू है।
 
आवाज देकर
मुझको बुलाना
जब जब मैं देखूंँ
 खयालों में आना।।

 मेरी सोच तुमसे
सबल हो रही है,
 दर्शन की इच्छा
 प्रबल हो रही है।।

 तू गुमनाम माँझी
किनारा दिखा जा ,
बड़ी देर कर ली
 जल्दी से आजा।।

 मुँसिफ मेरे
मुझको मंजिल बताना,
 जब जब मैं चाहूंँ
 खयालों में आना।।

 तेरी रहबरी का
जादू अटल है ,
इनायत से तेरी
 जगमग पटल है।।

 सद्भाव की तू
 मूरत निराली ,
हंँसता है जैसे
जगमग दिवाली ।।

कभी पग पड़े
 मेरे दर पर भी आना ,
जब जब मैं चाहूंँ
 ख्यालों में आना।।

 हरिशंकर सिंह सारांश 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts