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हमें जिंदगी से शिकायत ना होती !

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' March 18, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 
हमें जिंदगी से शिकायत ना होती! 
(कविता) 

हमें जिंदगी से शिकायत न होती
 जो आसान जीवन की चाहत न होती।

 सपने न होते, रवायत न होती
 अपनों की ऐसी खिलाफत न होती,
 दीपक जला था
यह जलता ही जाता ।
हवाओं में भरपूर ताकत न होती।।

 हमें जिंदगी से शिकायत न होती
 जो आसान जीवन की चाहत न होती।।

 हसरत न होती मुकामोंं की हमको
 कहानी में ऐसा अजब दौर होता।
 गुलशन में भी फूल खिल जाते मेरे
 गमे जिंदगी की इबारत न होती।

 हमें जिंदगी से शिकायत न होती
 जो आसान जीवन की चाहत न होती।।

 सूरज से रोशन मेरा ख्वाब होता
शिकवा न होता ,गिला भी ना होता।
 आजाद उन्मुक्त पंँछी की भााँती
पंँखों में मेरे हवा खूब होती ।

हमें जिंदगी से शिकायत न होती
 जो आसान जीवन की चाहत न होती।।

 मिला जो मुकद्दर ,उसे मान लेते
 जीवन को जीने की ,जिद ठान लेते। 
किसी और से हमको गुरबत न होती
हमें जिंदगी से शिकायत न होती।।
 जो आसान जीवन की चाहत न होती

 न बेचैन होते ,न गमगीन होते
 मुकद्दर के अंजाम ऐसे न होते।
 न रातों को जगते, न दिन में शिहरते
 अदावत की हमको ,न परवाह होती।।

 हमें जिंदगी से, शिकायत न होती, 
जो आसान जीवन की चाहत न होती।।

 हरिशंकर सिंह सारांश 

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