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है यह रीत पुरानी (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' March 31, 2022
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
है यह रीत पुरानी (कविता)
 छात्र विशेषांक 

जल्दी जगना जगकर  पढ़ना
 है यह रीत पुरानी ।
मान लीजिए सबका कहना ।
करो नहीं नादानी।

 भोर में उठकर प्यारे बच्चो
  शिक्षा ज्ञान बढ़ाओ।
 सूरज से पहले तुम जागो
 कभी नहीं अलसाओ।

 सुबह सवेरे जल्दी उठकर
बड़ों को शीश नवाओ।
 आशीशों की बारिश होगी
 अच्छे गुण अपनाओ ।।

अनुशासन का पाठ पढ़ो तुम
मति बनो अज्ञानी ।
है यह रीत पुरानी।।

 परंपरा और ज्ञान का दीपक
 चारों ओर जला दो
 तुम कुछ ऐसा करो जगत में
 हस्ती जाए जानी।
 है यह रीत पुरानी।।

 मकसद अपना पाने वालों
की तस्वीर बना लो।
 जो गुरुजन कहते हैं उसको
 मन से तुम अपना लो।।

 ज्ञान उसी को मिला सदाँ 
जिसने यह महिमा जानी।
 है यह रीत पुरानी।।

हरिशंकर सिंह सारांश 

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