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देखी हैं सारी सोखियाँ उनके शबाब में ।

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' May 20, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 

देखी है सारी शोखियांँ
 उनके शवाब में ।।
सारे जवाब मिल गए
उस लाजवाब में ।।

देखे चमन में फूल
अलग-अलग रंग के।
सब आके जैसे मिल गए
इक गुलाब में ।।

कुदरत खुदा की देखिए
 क्या-क्या बना दिया।
सारे हिसाब मिल गये
 उस बेहिसाब में ।।

'निर्झर' वो रूप अनूप है 
और प्यार बेशुमार ,
फिर क्यों न मस्त हो कोई
उसकी शराब में ।।
देखी है सारी सोखियांँ
उनके सवाब मेें।।

हरिशंकर सिंह सारांश 
 

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