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बीता पल भुलाकर चलती हूंँ (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' August 29, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 
बीता पल भुलाकर चलती हूंँ
( कविता)

बीता पल भुलाकर चलती हूंँ
हर रोज चेहरे पर चेहरा
 लगाकर चलती हूंँ।

बीते कल की सारी बातें
 भुला कर चलती हूंँ, 
बहु हूंँ --पत्नी हूंँ-- मांँ हूंँ
यही बस सोच रहती है ,
मैं सारे ख्वाब दवाकर चलती हूंँ।।

दिनभर की दौड़-धूप 
सबकी बातें मान कर 
फर्ज को सिर पर
 बिठाकर चलती हूंँ
बीता पल भुलाकर चलती हूंँ।।

हरिशंकर सिंह सारांश    

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