बड़े बड़ों को  फकीर होते देखा है  (कविता)'s image
Poetry1 min read

बड़े बड़ों को फकीर होते देखा है (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' May 19, 2022
Share0 Bookmarks 1455 Reads1 Likes
मेरी लेखनी मेरी कविता 
बड़े बड़ों को फकीर होते देखा है  
(कविता)

हंँसी में छुपी
 खामोशियों को देखा है।
मयखाने में बुजुर्गों को भी
जवान होते देखा है।।

हमने इंसानों को
जरूरत के बाद
 अनजान होते देखा है।।

क्यों भूल जाता है 
इंसान अपना अस्तित्व 
पैसा आते ही ,
दुनिया में बड़े-बड़े लोगों को 
फकीर होते देखा है ।।

हरिशंकर सिंह सारांश    

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts