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बहुत उड़ान बाकी है (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' June 27, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता 
बहुत उड़ान बाकी है
 (कविता)

परिंदे रुक मत
तुझमें अभी जान बाकी है ।
मंजिल दूर है
 बहुत उड़ान बाकी है।

यूंँ ही नहीं मिलती
रब की मेहरबानी ,
एक से बढ़कर एक
 इम्तिहान बाकी है।।

जिंदगी की जंग में
 है हौसला जरूरी,
जीतने के लिए
सारा जहान बाकी है।

परिंदे रुक मत
बहुत उड़ान बाकी है।।

हरिशंकर सिंह सारांश    
  

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