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मेरी लेखनी मेरी कविता
 आत्म मिलन के पल
(कविता )

दिवाली का त्यौहार
 हर दिल को भाता 
दिवाली को हर जन
मिलकर मनाता ।।

यह खुशियों की बेला 
यह दीपों का मेला,
यह मिलने मिलाने 
मनाने की बेला ।।

 हर दिल को रोशन
करने  का मेला ,
गमों को भुलाकर
 खुशियों का दामन
 पकड़ने का मेला।।

मुबारक हो सबको 
यह देवों का स्वागत
 करने की बेला ।।

हरिशंकर सिंह सारांश   

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