अंँधेरी रात की सुबह ढूंँढते हैं (कविता)'s image
Poetry1 min read

अंँधेरी रात की सुबह ढूंँढते हैं (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' May 2, 2022
Share0 Bookmarks 2184 Reads1 Likes
मेरी लेखनी मेरी कविता 
अंँधेरी रात की सुबह ढूंँढते हैं 
(कविता)
 
चलो हंँसने की कोई
वजह ढूंँढते हैं
 जिधर न हो गम 
 वह जगह ढूंँढते हैं
 अंँधेरी रात की
 सुबह ढूंँढते हैं। 

बहुत उड़ लिए
नीले काले गगन मेें
जमीन पर कहीं
हम सतह ढूंँढते हैं ।
इस अंँधेरी रात की
सुबह ढूंँढते  हैंं।

छूटा संग कितनों का
 जमाने की जंग में,
चलो उनके दिलों की
 हम गिरह ढूंँढते हैं ।।
इस अंँधेरी रात की
सुबह ढूंढते हैं ।।

बहुत वक्त गुजरा
भटकते हुए  ,
चलो इस रात की
 सुबह ढूंँढते हैं।।

हरिशंकर सिंह सारांश  

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts