"अंँधेरा कहीं रह न जाए चमन में" (कविता)'s image
Poetry1 min read

"अंँधेरा कहीं रह न जाए चमन में" (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' February 12, 2022
Share1 Bookmarks 1013 Reads1 Likes
मेरी लेखनी ,मेरी कविता
"अंँधेरा कहीं रह न जाए चमन में"
( कविता )

उदासी न हो तेरे मन में,
 अंँधेरा न छाए चमन में।

 निगाहें सदाँ ही
तेरी ताकती हों 
अविरल सी आंखों से
 नीले गगन में ,
अंँधेरा कहीं रह न
 जाए चमन में ।।

अविराम जीवन की
 नैया को लेकर, 
पतवार शिक्षा की
 हाथों में लेकर ।

बढ़ते रहो तुम
अविलंब आगे, 
निर्मल से मन में
 उम्मीद लेकर।

 मगर याद रखना 
यह ध्यान रखना ,
अंँधेरा कहीं रह
न जाए चमन में।

 उदासी क्यों छाई है
मन में ।।।

हरिशंकर सिंह सारांश

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts