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"आहट बड़ी अजीब है"कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' February 12, 2022
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मेरी लेखनी ,मेरी कविता 
"आहट बड़ी अजीब है" (कविता)

आहट बड़ी अजीब है
थोड़ा डरा रहा है,
सीने में छुपा कर
ओमीक्रोन ला रहा है ।

 खुशियों की सौगात है,
 पर थोड़ा भरमा रहा है।
 मुबारक हो दोस्तो
 नववर्ष आ रहा है।। 

पिछले अनुभव से
हमने जाना है ,
घर में बंद होने का ,
काम बंद होने का
 मर्म हमने पहचाना है।
 
वो सालती निगाहें
वो बचपन का डर
वो मौतों की फेरी
वो लासों का अंबर
फिर याद आ रहा है।
 
मुबारक हो दोस्तो
 नव वर्ष आ रहा है।

 खुशियांँ मनाओ
 अपनों से मिलो
मेलजोल बढ़ाओ
 सभी मतभेद भुलाकर
एक हो जाओ
दामन में खुशियांँ
 हजार ला रहा है।

 मुबारक हो दोस्तो
 नववर्ष आ रहा है ।।

स्वागत करो इसका
 नई उम्मीद , नए विचार
 आंँचल मेें  ला रहा है ,
मुबारक हो दोस्तो
 नव वर्ष आ रहा है।

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