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आग बहुत सी बाकी है (कविता)

हरिशंकर सिंह 'सारांश 'हरिशंकर सिंह 'सारांश ' August 12, 2022
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मेरी लेखनी मेरी कविता
आग बहुत सी बाकी है
(कविता)

भारत क्यों तेरी सांसों के
 स्वर आहत से लगते हैं !
अभी जियाले परवानों में
 आग बहुत सी बाकी है।।

क्यों तेरी आंखों में पानी
आकर ठहरा ठहरा है,
जब तेरी  नदियों की लहरें
 डोल डोल मदमाती हैं
 आग बहुत सी बाकी है ।।

हरिशंकर सिंह सारांश       

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