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'सुनहरा कल'

HarishHarish December 10, 2021
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जो कल तक थी, ज़िंदगी

कभी रास नहीं आई


मगर सुनहरे कल की उम्मीद,

मुझे हर रोज़ नज़र आई


आज़ भी सूरज की नूतन किरण, 

एक स्याह रात का अंत बनकर आई


 -हरीश ( @Harish_cso

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