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निगाहों में हद-ए-आसमां है

HarishHarish November 27, 2021
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निगाहो में हद-ए-आसमां है

कहां चुनी हमने आसान राह है

जुगनू सी हो गई है ज़िंदगी

रोशनी की किसे परवाह है

- हरीश @Harish_cso

 २६-९९-२०२१

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