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तेरी खूबसूरती

Harish VidrohiHarish Vidrohi October 30, 2022
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सोचता हूँ कि तेरी खूबसूरती  में क्या लिखूँ,
तुझे बर्फ की तरह सख्त लिखूँ यां मोम की तरह नर्म लिखूँ...

मोम के पास कभी आग को लाकर देखूँ,
सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूँ……

कभी चुपके से चला आऊँ तेरी खिलवत में,
और तुझे तेरी निगाहों से बचा कर देखूँ….

मैने देखा है ज़माने को शराबें पी कर,
मेरा दम निकल जाये अगर  तुझे होश में आकर देखूँ…

दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र आता है,
सोचता हूँ तेरी तस्वीर लगा कर देखूँ….

तेरे बारे में सुना ये है के तू चांदनी की शीतलता है 
मैं ज़रा देर तेरी शीतलता क़ो आगोश में भरकर तो देखूँ….

याद आती है तू मुझे  हर बार यूं ही,
मैने सोचा था के मैं तुझको भुला कर  तो देखूँ….!!
स्वरचित :-हरीश  विद्रोही

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