बरसात's image
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लिख रहा हूँ बरसते बरसात की कहानी,
कही खुशी से चित्त मन की कहानी,
तो कहीं कच्चे मकानों की टपकती छत की कहानी,

तुम रखते हो ना ख़्वाहिस हर दम,
कि काश ये बारिश कुछ इस तरह जम के बरस जाये,
तो जीवन में आनंद की ये बहारे..
कुछ इस तरह मन में उतर जाये,
जैसे कोई प्रेम गीत सा कानों में घुल जाये,

इसी के विपरीत होती है कुछ ख्वाहिशे,
जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे कुछ गरीबों की जुबानी,
कि काश ये बारिश अब थम जाये,
ताकि हमारे लरजते आशियाने,
बस इस बार गिरने से बच जाये,

लिख रहा हूँ बरसते बारिश की कहानी,
कही खुशी से चित्त मन की कहानी,
तो कहीं कच्चे मकानों की टपकती छत की कहानी

#स्वरचित :-हरीश विद्रोही

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