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आसान नहीं है मंजिल

Harish VidrohiHarish Vidrohi September 4, 2022
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आसान नहीं कोई मंजिल है,
ये सफऱ बड़ा ही मुश्किल है,

गर मंजिल क़ो तुम्हें पाना है,
तो खुद पत्थर बन जाना है, 

राहो में पड़े इन काँटों क़ो
तुमको बस झूठलाना है,
खुद से किया है जो वादा,
उस वादे क़ो निभाना है 
गर मंज़िल क़ो तुम्हें पाना है,
तो खुद पत्थर बन जाना है,

ये राह बडी ही मुश्किल है,
ये सफऱ बड़ा ही मुश्किल है,
तुमको बस चलते जाना है,
गर मंजिल क़ो तुम्हें पाना है,
तो खुद पत्थर बन जाना है 

हाँ आसान नहीं कोई मंजिल है,
ये सफऱ बड़ा ही मुश्किल है,
अब मुश्किल है तो मुश्किल है,
हर मुश्किल से अब लड़ना है,
गर मंजिल क़ो तुम्हें पाना है,
तो खुद पत्थर बन जाना है

जीवन की हर मुश्किल से,
अब तुमको पार उतरना है,
और दुनिया क़ो समझाना है,
बेशक ये पथ बड़ा ही मुश्किल है,
गर मंज़िल क़ो तुम्हें पाना है,
तो खुद पत्थर बन जाना है,

आसान नहीं कोई मंज़िल है,
ये सफऱ बड़ा ही मुश्किल है,
बस तुमको चलते जाना है,
क्यूंकि मंजिल क़ो तुम्हें पाना है...
क्यूंकि मंजिल क़ो तुम्हें पाना है !!!

#स्वरचित :-हरीश विद्रोही

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