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किमस्ति काव्यं ?

Hardik Dadheech 'Vibhakar'Hardik Dadheech 'Vibhakar' March 22, 2022
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काव्य, चकोर को चंदा से मिलने की अभिलाषा है,
काव्य किसी अतिलंघित जन के स्वातंत्र्य की आशा है,

कभी काव्य व्याकरण बोध है ज्ञानी त्यागी का,
कभी काव्य व्यथा विरही की, प्रेम है अनुरागी का

कभी काव्य जीवन का दुष्कर कानन है,
कभी हास आभरणित बालक आनन है,

कभी काव्य पूजा है ईष्ट ईश्वर की,
कभी मोती सीपियों वाला, कभी उड़ान नभचर की,

कभी कविता है कवियों के मुख की,
कभी गीति है संसारी सुख की,
कभी काव्य नभ पर चढ़ा हुआ सूरज है,
कभी काव्य पंक में खिला हुआ नीरज है,

कभी कविता एक वनिता प्रियतर,
कभी काव्य है एक आकर्षक नर,
कभी काव्य एक अश्रु पूरित लोचन है,
कभी काव्य न बांधा गया बंधन है,
 
कभी काव्य कृष्ण - गीता गीति है,
कभी काव्य चाणक्य की नीति है,
कभी काव्य कवि की आप बीती है,
कभी काव्य किसी की अंतिम प्रीति है।

पूछो अवितथ तो काव्य जगत का विस्तार है,
कहो सत्य तो काव्य ही जीवन का सुंदरतम उपहार है,
है अचल सत्य यह कि काव्य हास का प्रियतम प्रसार है,
लिखो सत्य तो कविता में ही तो सकल संसार है।

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