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उससे कहना कि चला आए सँभाले मुझको

इससे पहले कि अजल आ के उठा ले मुझको


मैं वो पौधा हूँ जिसे तू ने हरा रक्खा था

आज मैं सूख रहा हूँ तो बचा ले मुझको


दिल तो कहता है अंधेरे में बसा लूँ दुनिया

वरना अब नोच ही खायेंगे उजाले मुझको


ये बदन ख़ाक हुआ रूह मगर बाक़ी है

अब भी ज़िंदा हूँ तो आ और सता ले मुझको


गर वही होता है 'सरवर' जो लिखा होता है

फिर तो मंज़ूर मिरे पाँव के छाले मुझको

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