वक्त's image
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माना कि फितरत है तेरी, 


बस चलते ही जाने की


रुकता तू चंद लम्हों के लिए, 


मैं वक्त रहते घर पहुंच जाता।



पड़ गए पैरों में छाले, 


तेरे साथ चलते चलते


थमता जो तू कहीं, 


तो मैं भी ठहर जाता ।।



एक तू ही बचा था पास मेरे, 


जो मैं दे सकूं सबको


बदला है जबसे तू


कोई मेरे घर नहीं आता।।



यादों में बसा ली मैंने, 


सब अच्छाइयां तेरी


सुनते हैं जाने वालों की तरह, 


तू लौट कर नहीं आता।।



ऐ वक्त तू थमता जो कहीं, 


तो मैं भी ठहर जाता।





~गुंजन









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