उम्मीद's image
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जब पतझड़ का मौसम


 आएगा


और नहीं बचेगा


किसी भी डाली पर


एक भी पत्ता...



तब तुम बन जाना


वो आखिरी पल्लव


और अटके रहना उस


 वृक्ष पर...



बनके एक उम्मीद


कि जीवन प्रारंभ होगा


फिर से


एक नई मिट्टी


एक नई बारिश के


साथ ।।



तो क्या हुआ


जो नष्ट हो गई ये सभ्यता


तुम देना ये उम्मीद


कि फिर से आयेगा कोई


पुरातत्ववेत्ता


ढूंढते हुए इस सभ्यता के


ध्वंसावाशेष


और रचेगा एक नया


 इतिहास


एक सुंदर वर्तमान


और


एक बेहतर भविष्य।।





हे पल्लव !!


तुम अटके रहना


वृक्ष पर


बन के एक उम्मीद !!!





गुंजन

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