तुम्हारे संघर्ष's image
Poetry1 min read

तुम्हारे संघर्ष

Gunjan VishwakarmaGunjan Vishwakarma March 2, 2022
Share0 Bookmarks 239 Reads2 Likes
मैंने नहीं लिखी कभी
कोई दुख भरी कविता 
मां के लिए ।


मैंने कभी नहीं देखा था उसे
फूंकते हुए चूल्हे में अपना जीवन ।


न ही देखा था 
ढोते हुए पानी के साथ 
जीवन का बोझ ।


पर मैंने देखा था उसे
संवारते हुए 
कच्चे आंगन और कच्चे मन ।


मैंने देखा था
बारिश में वो कैसे
टपकते घर का सारा पानी 
करती थी जमा खाली बर्तनों में ।


बड़ा नायब तरीका था उसका 
जल संचयन का ।
पर उसने आंखों की बारिश 
किस बर्तन में जमा की  
नहीं जानती ।


मैंने देखा संघर्षों से भरा 
एक जीवन
एक बेहतर जीवन के लिए ।

उसके संघर्ष मेरी कविताओं का
दुख कभी नहीं बने 
उसके संघर्ष 
मेरे आदर्श हैं ।।




गुंजन

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts