प्रतीक्षा's image
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पथराने लगी हैं


मेरी प्रतीक्षारत आंखें



जो ताकती रहती हैं


बंद दरवाज़ो को



जो उदास हैं


इस शाम की तरह



जो ढल रही है


एक सूरज को लेकर



जो अकेला


आसमान में जल रहा था

एक बादल की तलाश में



जो बरस जाता

इस प्यासी धरती पर



जो प्रतीक्षारत है


भीग जाने के लिए


मेरी तरह



जो खोलना चाहती है


एक खिड़की उम्मीद की



जो कह रही है


कि प्रतीक्षा दूसरा नाम है


सब्र का


जिसका फल मीठा होता है


शहद सा



और मैं सोचती हूं


उस खिड़की से

बाहर झांकती



कि अगर


जितनी लंबी प्रतीक्षा


उतनी ही अधिक मिठास



फिर क्यूं

पथराने लगती हैं


प्रतीक्षारत आंखे....????



~गुंजन





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