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मैंने लिया अपने जीवन


का पहला निर्णय


जब मैं ब्रह्म का एक अंश थी


मुझे चुनना था


प्रेम और करुणा में से एक को


और मैंने चुना करुणा को


मैं सोचती थी करुणा है


प्रेम से अधिक 
वश्यक  ।।



फिर मुझे लगा


निर्णय की स्थिति आती
 है


जब अनेक विकल्प हों


मैंने फिर एक निर्णय
 लिया


मैं अपने जीवन को


नहीं बांधूंगी


विकल्पों में ।।



पर मैंने जाना कि


कभी कभी जीवन भी 
तो


रख देता है विकल्प


हमारे समक्ष


और चुनाव करना होता है


सही या गलत



अच्छे या बुरे का



और मैंने फिर एक


 निर्णय लिया


कि मैं सुनूंगी हमेशा


अपने मन की


क्यूंकि


दस दस सिर वाले भी


गलत साबित हुए


 इतिहास में ।।





गुंजन







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