मां's image
Share0 Bookmarks 0 Reads0 Likes
मैंने नहीं लिखी कभी
कोई दुख भरी कविता 
मां के लिए ।

मैंने कभी नहीं देखा था उसे
फूंकते हुए चूल्हे में अपना जीवन ।
न ही देखा था 
ढोते हुए पानी के साथ 
जीवन का बोझ ।

पर मैंने देखा था उसे
संवारते हुए 
कच्चे आंगन और कच्चे मन ।

मैंने देखा था
बारिश में वो कैसे
टपकते घर का सारा पानी 
करती थी जमा खाली बर्तनों में ।

बड़ा नायब तरीका था उसका 
जल संचयन का ।
पर उसने आंखों की बारिश 
किस बर्तन में जमा की  
नहीं जानती ।

मैंने देखा संघर्षों से भरा 
एक जीवन
एक बेहतर जीवन के लिए ।
उसके संघर्ष मेरी कविताओं का
दुख कभी नहीं बने 
उसके संघर्ष 
मेरे आदर्श हैं ।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts