कल्पना's image
Share0 Bookmarks 172 Reads1 Likes
मेरी कल्पना ही मेरा यथार्थ है

उकेर देती हूं जिसे

मैं जीवन के कैनवास पर

मेरे चित्रों में 

होती नहीं किस्मत के जैसी लकीरें

वो बने हैं

करीने से सजाए गए 

शब्दों से 

और उनमें भरे हैं

रंग भावों के

प्रकृति के 

और प्रेम के ।।



मैंने अपनी कल्पना में

छुपा ली हैं 

अपने बचपन की कहानियां

अब जब वो बचपन नहीं रहा

न उन कहानियों के साथ

गूंजती हुई आवाज़ ही है

तो मैं लगाती हूं
 
गोते अपनी कल्पना में

और मिलके सब किरदारों

से चली आती हूं

लेके अपने थैले में

थोड़ा सा बचपन ।।



~गुंजन

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts