बसंत और तुम's image
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मैं नहीं हूं किसी बसंत की प्रतीक्षा में
जिसके आने पर ही खिले कुसुम
और कूके कोयलें ।
पीत वर्ण ओढ़े तुम्हारा चेहरा
और तुम्हारी आंखों में चमकती
पीली धूप मुझे मिला देती है 
हर दिन बसंत से ।
जब तुम्हारे कपोल
हल्की सी ठंड  में होते हैं 
गुलाबी और लाल
तो खिलते हैं गुलाब 
मेरे मन के आंगन में ।
और जब तुम ओढ़ लेती हो
मेरी परेशानियों को 
धानी चादर की तरह
तब तुम्हारा संबल 
ओस की बूंदों सा 
शीतल कर देता है 
मेरे क्लांत मन को ।
तुम हो तो 
बसंत हूं मैं,
तुम नहीं 
तो क्या कभी आएगा बसंत???

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