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बचा रहा बस प्रेम

Gunjan VishwakarmaGunjan Vishwakarma February 9, 2022
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सदियों से
उगती रहीं हैं सभ्यताएं
नदियों के किनारे
और एक प्रक्रिया के तहत
नष्ट भी होती रहीं ।


विकास और विनाश के
इस निरंतर क्रम में
खोजे गए अवशेषों में
जो मिले हमेशा
वो थे
मनुष्यता और प्रेम ।।


प्रेम के बीज अंकुरित होते रहे
उन  ज़मीनों पर भी
जिन्होंने देखा, समझा
जाना और माना
सिर्फ घृणा को ।।


विकसित होती सभ्यताओं
और विलुप्त होती प्रेम कहानियों
के बीच भी
बचा रह गया
प्रेम ।।

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