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अमावस का चांद

Gunjan VishwakarmaGunjan Vishwakarma March 16, 2022
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उसकी खिड़की से जो आसमान दिखता था

उसमे कभी नहीं निकलता था

पूर्णिमा का चांद ।



उस आसमान में दिखता था

अमावस का चांद 

जो होते हुए भी 

नहीं होता है ।



वो भी तो अमावस के चांद जैसा ही था

था भी और नहीं भी 

होता था पर किसी को दिखता नहीं ।



अमावस की रात को जब 

भूख लगती थी

वो मुंह खोल कर 

खा लेती थी तारों को ।



उसे जब भूख लगती थी

वो कुछ नहीं खा पाता था

भूख ही मुंह खोल कर

खा लेती थी उसे ।।





~गुंजन





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