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आज हम फिर मिले मेरे महबूब

अरसे बाद नही

बस चंद दिनो बाद

लेकिन पता नही क्यों ऐसा लगा अरसे बाद मिले हैं

हमारी यह मुलाक़ात भी एक काग़ज़ी मुलाक़ात में सिमट कर रह गई

अब हम फिर दूर हो रहे हैं ,

हमेशा के लिए नहीं ,

लेकिन कब तक के लिए ?

यह हम नहीं

एक बीमारी तय करेगी

लेकिन हम मिलेंगे, ज़रूर मिलेंगे

शायद पिछली बार की तरह एक अरसे बाद

या उससे पिछली बार की तरह सालों बाद।


:- ग़ुलाम रज़ा ख़ान

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