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मुनीरी 

चाँद से बिखरने वाली रोशनी से
रोशन होती रातो का नाम है मुनीरी 
सूरज से निकलने वाली किरन से
चमचमाता जहाँ का नाम है मुनीरी 

आसमाँ में अनगिनत तारे भी है
दूरी से रोशनाई दिखाने का नाम है मुनीरी
इज्जत जो हर इंसाँ करता ही रहे 
उसी खिदमत का नाम है मुनीरी 

इंसाँ एक हूं चाँद की तरह हूँ
जिस दिन बिखर गया रोशन जहाँ मिलेगा 
जाओ और बाँट दो मेरे हिस्से की रोशनी
उन्ही अंधेरो को सजाता मेरा नाम मिलेगा 

आज रोशन भी कर देंगे वतन हमारा है
रोशनी करना और देने का नाम है मुनीरी 
जब से ये रोशन हुआ है मेरा मोहल्ला
हर किसी की जुबां पर नाम है मुनीरी 

जिंदगी सभी की रोशन नही होती
रोशन करने की कोई हद नही मुनीरी 
खुशबू-ए-अल्फाज़ की तरह मिलते है हम
मुहब्बती अखलाक का नाम है मुनीरी 

रोशनी का भी रोशन दान होता है
रोशनी का भी कोई काम होता है 
अंधेरे तो बहुत देखे है राह में हमने
राहो को रोशन करने का नाम है मुनीरी ।

- गुड्डु मुनीरी (सिकंद्राबादी)

शबदार्थ

मुनीरी - रोशन करने या रोशनी करने वाला 

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