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कुछ चंद दिनों की बात हैं

Gopinath SGopinath S February 4, 2022
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कुछ चंद दिनों की बात है।  

 घन्टोबर अखबार पड़ते थे।

काम करके खुश होते थे।

 सिनेमा देखने जाते थे। 

 बच्चों को माल में घुमाते थे। 

 पसंद की खाना मंगवाते थे। 

कभी कभी घर मे भी खाते थे। 

 बीमार पड़नेपर तो डॉक्टर के पास दौड़त थे।                          

 

आज कल स्तिथी बदल गया है। 

बाहर जाना माना है। 

 घर मे बैठ कर काम करते है।

 अखबार बन्द करदिया है।

 बच्चे घर में ही खेलते है।

 बीवी खुश लग रही है।

घर का खाना अच्छा लगता है।

 बीमार पड़नेका डर लगता है।        

 

 इसका मतलब क्या है सोच रहा हूँ। 

पहले स्तिथि से अबकी स्तिथि बेहतर है

क्या हम गलत तरीके से जी रहे थे?

 अगर लॉकडौन बंद कर दिया तो कैसे जीना है?

 सोचने का वक्त आया नही है

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