क़ातिल अदा...'s image
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वो जो आये फ़िज़ा महक उठे,

गुलशन में बहार आ जाये। 


उनके चेहरे पे बिखरी जुल्फें,

बादलों से जैसे चाँद निकले।


इन क़ातिल आदाओं से,

कोई कैसे बच के निकले।


©गोपाल भोजक

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