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कैसे करूँ नूतन वर्ष अभिनन्दन

गोपाल भोजकगोपाल भोजक April 2, 2022
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पर्व सभी के अलग हो गए कैसे ले नूतन आंनद,

घृणा द्वेष से भर गया मानव रंगों में बंट गये है पर्व।

साझी धरा पर अब इंसानियत फूट फूट कर रोती है,

पहले सा इंसान आजकल किस्सों में मिलता है।

भूख गरीबी और महंगाई के दौर में,

कैसे करूँ नूतन वर्ष अभिनन्दन।


©गोपाल भोजक

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